कहानी: “वीहान का गुस्सा और मम्मा का जादू”
Sensory behaviours in children – वीहान सिर्फ 5 साल का था। बहुत प्यारा, बहुत चंचल। लेकिन कभी-कभी वो अचानक गुस्से में आकर किसी को pinch कर देता था, कभी मम्मा को slap कर देता, कभी अपने दोस्तों को बिना बात के धक्का दे देता।
एक बार की बात है – वीहान अपने मम्मा-पापा के साथ एक function में गया। वहां बहुत सारे लोग थे। सब उसे प्यार कर रहे थे, कोई उसे गोदी में लेना चाहता था, कोई उसके गाल खींच रहा था।
वीहान अंदर ही अंदर uncomfortable feel कर रहा था – पर वो बोल नहीं पा रहा था। तभी एक अंकल ने उसे छूने की कोशिश की और वीहान ने झट से उन्हें धक्का दे दिया।
सब लोग चौक गए। किसी ने कहा, “ये बच्चा बहुत बद्तमीज़ है।” वीहान के इस व्यवहार को लोग बदतमीज़ी समझते थे, लेकिन असल में ये एक sensory behaviour था — जो कि बहुत से बच्चों में देखा गया है। इस तरह के sensory behaviours in children को समझना और सही तरह से handle करना बहुत ज़रूरी है।
मम्मा चुप रहीं… उन्होंने कुछ नहीं कहा।
घर आकर वीहान गुस्से से रोने लगा। “मुझे अच्छा नहीं लगता कोई मुझे बार-बार छूए!”
मम्मा ने प्यार से उसका हाथ पकड़ा और बोलीं, “पता है वीहान, तुम्हारा ये behaviour तुम्हारी body की एक ज़रूरत है। जैसे भूख लगती है ना, वैसे ही कभी-कभी तुम्हारे हाथों को भी कुछ महसूस करने की ज़रूरत लगती है। और तुम बोल नहीं पाते, तो ऐसे react करते हो।”
मम्मा ने एक soft ब्रश निकाला और वीहान की fingers पर हल्की मसाज करनी शुरू की।
“ये क्या कर रही हो मम्मा?” वीहान ने पूछा।
मम्मा मुस्कराईं, “ये है जादू – जो तुम्हारे अंदर के गुस्से और चिढ़ को आराम देगा। हम रोज़ करेंगे ये।”
धीरे-धीरे वीहान को comfort मिलने लगा। अब वो function में भी जाता, तो मम्मा की बताई tricks इस्तेमाल करता — दीवार को press करता, हाथों पर मालिश करवाता… और अब लोग कहते, “वाह, कितना प्यारा और शांत बच्चा है!”
जैसे वीहान के साथ हुआ, वैसे ही बहुत से बच्चों के साथ होता है।
क्या आपके बच्चे को भी कभी-कभी बिना बात के pinch करने, slap करने या किसी को अचानक धक्का देने की आदत है?
क्या वो बार-बार कुछ छूता है, या public places में खुद को control नहीं कर पाता?
अगर हां, तो घबराइए नहीं — आप अकेले नहीं हैं।
चलिए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और हम इस तरह के sensory behaviours को कैसे समझें और धीरे-धीरे कम करें।”
बच्चों में कुछ ऐसे व्यवहार देखने को मिलते हैं जो ना सिर्फ माता-पिता को परेशान करते हैं, बल्कि समाज में भी दूसरों को असहज बना देते हैं। जैसे कि बार-बार किसी को pinch करना, अचानक slap कर देना, किसी को धक्का दे देना, बार-बार किसी को छूना या scratch करना।
कई माता-पिता अक्सर ये शिकायत करते हैं:
“मेरा बच्चा लोगों को मारता है, pinch करता है, functions में लोगों को धक्का देता है।”
ऐसे व्यवहार को हम Sensory Behaviour in children कहते हैं। ये कोई सामान्य शरारत या बदतमीजी नहीं होती, बल्कि एक internal sensory need होती है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि ये sensory behaviours क्यों होते हैं, इनका समाधान क्या है और किन exercises से आप अपने बच्चे को धीरे-धीरे comfort दे सकते हैं ताकि ये व्यवहार कम हो सकें।
सबसे पहले समझें: Sensory Behaviour in Children क्या है?
Sensory Behaviour in children एक तरह का Self-Stimulating Behaviour होता है। इसका मतलब है कि बच्चा खुद को किसी बाहरी या आंतरिक उत्तेजना से शांत करने या उत्तेजित करने के लिए ये व्यवहार करता है।
जैसे – pinch करना, slap करना, बार-बार किसी को छूना — ये सब बच्चे के comfort के तरीके हो सकते हैं।
बच्चा ऐसा तब करता है जब:
- वो irritate होता है
- वो खुद को express नहीं कर पाता
- उसे अंदर से कोई discomfort हो रहा होता है
➡ इसलिए जब भी हम बच्चे को इस behaviour के लिए रोकते हैं, तो हमें ध्यान रखना होगा कि केवल मना करना काफी नहीं है। हमें उसकी sensory need को किसी और healthy माध्यम से compensate करना होगा।
एक आसान उदाहरण से समझें Sensory behaviours in children:
अगर बच्चा बहुत प्यासा है और आप उसे सिर्फ खाना दे रहे हैं, तो क्या उसकी प्यास बुझेगी? बिल्कुल नहीं।
उसे तो पानी ही चाहिए।
उसी तरह, अगर बच्चे को hitting या touching behaviour से comfort मिल रहा है, और हम बस “मत करो” कहकर उसे रोकते हैं, तो उसका discomfort और बढ़ जाएगा।
➡ इसलिए हमें उसकी sensory need को समझकर, उसको वही comfort किसी दूसरे safe और acceptable तरीके से देना है।

समाधान क्या है? – एक Simple Approach
1️ Distract और Compensate करें
अगर बच्चा अचानक किसी को pinch करता है, तो तुरंत गुस्से में आने की बजाय:
- उसका ध्यान किसी और चीज़ की तरफ divert करें
- उसके हाथों पर हल्के pressure के साथ massage करें
- उसके fingers और palms को press करें
इससे बच्चा तुरंत शांत भी होगा और उसकी sensory need भी पूरी हो जाएगी।
लेकिन ध्यान रखें – ये काम सिर्फ एक बार से नहीं होगा।
➡ आपको रोजाना 4–5 बार इस तरह के exercise consistent तरीके से करने होंगे।
2️ Patience रखें – Instant Results की उम्मीद न करें
ये behaviours धीरे-धीरे ही खत्म होंगे।
हो सकता है 6 महीने से लेकर 1 साल तक का समय लगे।
➡ इसलिए संयम और consistency बहुत ज़रूरी है।
आपको हर बार जब बच्चा ऐसा करे, उसी calmness से उसे handle करना है।
धीरे-धीरे उसका nervous system stable होने लगेगा और ये behaviours कम होने लगेंगे।
3️ गुस्सा न करें – Emotions को समझें
जब बच्चा किसी को pinch करता है या जोर से मारता है, तो ज़रूरी नहीं कि वह किसी को नुकसान पहुंचाना चाहता हो।
वह बस अपने emotions express कर रहा होता है।
➡ Parents को चाहिए कि वे अपना temper control करें और बच्चे की emotions को समझें।
अगर आप अपने बच्चे को अच्छे से समझेंगे, तो ना सिर्फ आप calmer रहेंगे, बल्कि बच्चा भी आपसे better connect करेगा।
घर पर करें ये Sensory Exercises (हर दिन 4-5 बार)
अब बात करते हैं उन exercises की जो आप अपने बच्चे के साथ घर पर कर सकते हैं:
1. हाथों की Massage – अलग-अलग Textures से
- Soft और rough दोनों तरह के ब्रश का इस्तेमाल करें
- Fingers, palms, और nails पर हल्की massage करें
- दोनों हाथों पर करें – ऊपर और नीचे की तरफ से
लाभ: बच्चे की touch sensitivity और impulsive touching कम होती है।
2. Textural Exposure Activity
- चावल, दाल, रेत या सॉफ्ट कपड़े में हाथ डलवाएं
- हाथों से clockwise और anticlockwise घुमवाएं
- Flaxseed और corn-flour का गाढ़ा paste बनाकर हाथों पर लगाएं और छोड़ दें 5 मिनट के लिए
लाभ: बच्चे को smooth और rough surface की पहचान होती है, साथ ही उसकी sensory craving भी कम होती है।
3. Deep Pressure Activities
- Wall Pressing
- Frog Walk
- Crawling
- Clay से shapes बनाना
लाभ: यह गतिविधियाँ hand flapping, hitting और impulsive behaviours को कम करने में मदद करती हैं।
4. Emergency Sensory Handling (बाहर की स्थिति में)
अगर आप किसी function या भीड़ वाली जगह पर हैं और बच्चा अचानक pinch या slap कर देता है:
- Calm रहें
- उसके हाथों पर deep pressure massage करें
- Fingers और palms को gently press करें
➡ यह quick technique बच्चे को तुरंत calm करने में मदद करती है।
5. Ball Activities
- Dribbling with bouncing ball
- Catch & throw
- Sensory ball से hand rubbing
लाभ: हाथों पर sensory input मिलता है, और यह motor control सुधारता है।
Final Tips for Parents:
- बच्चे को समझिए, डराइए नहीं
- हर बार calm और confident रहिए
- Regular exercises में consistency रखिए
- Immediate results की उम्मीद मत कीजिए — समय दीजिए
- अपने emotions पर control रखिए, क्योंकि आपकी energy बच्चे को directly affect करती है
निष्कर्ष (Conclusion):
Sensory behaviours in children को समझना और manage करना कोई एक दिन का काम नहीं है। ये एक process है — जिसमें patience, consistency, और सही techniques की जरूरत होती है।
आपके बच्चे को आपकी ज़रूरत है — गुस्से की नहीं, समझदारी की।
अगर आप calm और consistent रहकर इन exercises को follow करेंगे, तो निश्चित रूप से धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगेगा।
“हर behaviour के पीछे एक need होती है — हमें उसे समझकर सही रास्ता देना होता है।”
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Sensory behaviours in children को समझना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है उन्हें सही तरीक़े से manage करना। हर बच्चे की sensory needs अलग होती हैं और उन्हें एक personalized और expert approach की ज़रूरत होती है। यही काम करता है Ayush Speech and Hearing Clinic।
हम कैसे मदद करते हैं:
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हर बच्चे की sensory profile को विस्तार से समझा जाता है – कौन से texture से परेशानी होती है, क्या कारण हैं बार-बार hitting या slapping के, कौन से triggers हैं? - Tailored Therapy Plan:
हर बच्चे के लिए उसके specific behaviour के अनुसार एक therapy plan तैयार किया जाता है जिसमें Occupational Therapy, Sensory Integration Activities, और Behavioural Techniques को शामिल किया जाता है। - Parent Training & Home Program:
हम parents को हर session के बाद simple, doable activities बताते हैं जो वे घर पर कर सकते हैं – ताकि बच्चे को consistent support मिले। - Progress Tracking & Guidance:
हम हर छोटे improvement को track करते हैं और parents को लगातार update देते हैं ताकि वे motivated और informed रहें। - Multidisciplinary Support:
Speech therapists, occupational therapists, और behavioural experts मिलकर holistic development पर काम करते हैं।
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